5/24/2007

द हिचहाइकर्स गाइड टू द गैलेक्‍सी

साइंस फ़ि‍क्‍शन के बारे में मैं उतना ही जानता हूं जितना करीना कपूर नॉम चॉम्‍स्‍की के बारे में जानती होंगी. डगलस एडम्‍स का नाम भर सुना था, ‘द हिचहाइकर्स गाइड टू द गैलेक्‍सी’ से उनके असोसियेशन की ख़बर नहीं थी. बहरहाल, इसे भी संयोग ही कहेंगे कि फ़ि‍ल्‍म हत्‍थे चढ़ी तो हमने सोचा एक नज़र मार लेते हैं. आख़ि‍र कुछ तो बात होगी कि इतने समय से ‘हिचहाइकर्स..’ शीर्षक हवा में है. फ़ि‍ल्‍म ख़राब हुई तो दस मिनट बाद खेला खत्‍म करके सब भूल-भुला जाएंगे. तो भई, हमने फ़ि‍ल्‍म देखी. और दस मिनट नहीं पूरी देखी. और चुटीले संवादों और डिज़ाइन की जटिलता में रस लेकर देखी. डगलस एडम्‍स की निहायत लोकप्रिय किताब व सत्‍तर के दशक के मशहूर बीबीसी रेडियो शो पर आधारित फ़ि‍ल्‍म को एडम्‍स के फैन्‍स ने शायद बहुत पसंद नहीं किया, मगर हमने जो किताब पढ़ी नहीं और फ़ि‍ल्‍म को फ़ि‍ल्‍म की ही तरह देख रहे थे, सचमुच आनंदित हुए. गार्थ जेनिंग्स‍ की यह पहली फ़ि‍ल्‍म (2005) है. और लहे तो एक नज़र मारने से आप भी मत चूकियेगा.

6 comments:

vimal verma said...

नोट कर लिया है ज़रूर देखुन्गा!!!!!

चंद्रभूषण said...

Film to nahin dekhi lekin 1989 ya 90 me Patna me kitab padhi thi. kuchh hisse hilarious hain. khaskar vah, jisme ek grah ke un bhayanak aliens ka jikr hai, jinki IPC me sabse badi saja kavita sunane ki hai. pata nahin print ke chutilepan ko camera pakad paya hai ya nahin. vaise is kitab ko science fiction ke bajay anti- science-fiction jaisa kuch kahna jyada behtar rahega. aapki iccha aur ijazat ho to kuch asli science fiction apni taraf se pesh karun...

Pramod Singh said...

अरे, चंदू प्‍यारे-दुलारे.. मेरी इच्‍छा और इजाज़त? मैं हूं कौन, भइया? आस्‍तीन में छिपाकर रखे हो तो निकालो जल्‍दी-जल्‍दी!

v9y said...

मैंने किताब पहले पढ़ी और फ़िल्म बाद में देखी. किताब वाले ह्यूमर जैसी 'सटलटी' फ़िल्म में लाना बड़ा मुश्किल काम था. मेरे ख़याल से फ़िल्म बुरी नहीं बनी थी. पर किताब जिस दर्जे की क्लासिक हैसियत रखती है, इसके फ़ैनों को इसके और किसी भी रूप से संतोष नहीं होने वाला.

अभय तिवारी said...

आप्को जँच गई अच्छी बात है.. पर मैने जब देखी तो काफ़ी सस्ती मद्दी लगी.. स्टार वार्स जैसी कोई विराटता नहीं थी..बावजूद इसके कि स्टार वार्स किसी ओरिजिनल वर्क पर आधारित नहीं.. वरन स्वयं एक ओरिजिनल वर्क है.. और क्या वर्क है साब.. पूरी एक पुराण गाथा है.. जो अद्भुत रस स्टार वार्स में मिला वो इसमें निहायत गायब रहा.. इसलिये थोड़ा खिन्न रहा.. और अगर आप्ने स्टार वार्स छ्हों भाग एक साथ न देखें हो.. तो ज़रूर देखें.. एक अनुभव है..

अनूप शुक्ल said...

हमने न किताब बांची न सनीमा देखा लेकिन आपकी बात नोट कर ली।